Tuesday, December 9, 2025
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अडानी की संपत्ति में आई बड़ी गिरावट, एक साल में 3.4 लाख करोड़ का नुकसान किससे हुआ?

वित्त वर्ष 2025 अडानी ग्रुप के लिए काफी उतार चढ़ाव वाला रहा. ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में काफी गिरावट देखने को मिली. इस गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिका में लगे आरोप हैं. जिसे अडानी ग्रुप ने कभी स्वीकार नहीं किया. उसके बाद भी निवेशक अडानी ग्रुप के शेयरों के प्रति सतर्क रहे. शेयर बाजार के आंकड़ों को देखें तो अडानी ग्रुप के मार्केट को वित्त वर्ष 2025 में 21 फीसदी या 3.4 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयरों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है, इस साल उनके बाजार पूंजीकरण का लगभग आधा हिस्सा खत्म हो गया है, इसके बाद अडानी एंटरप्राइजेज का स्थान है. आइए आपको भी बताते हैं अडानी ग्रुप की किस कंपनी को कितना नुकसान हुआ है.

इस कंपनी को हुआ सबसे ज्यादा नुकसान

शुक्रवार, 21 मार्च तक, अडानी ग्रीन एनर्जी का कुल बाजार मार्केट कैप 1.46 लाख करोड़ रुपये था, जबकि वित्त वर्ष 2024 के आखिरी कारोबारी दिन 28 मार्च, 2024 को कंपनी का मार्केट कैप 2.90 लाख करोड़ रुपए देखने को मिला था. इसका मतलब है कि कंपनी के मार्केट कैप में करीब 50 फीसदी का नुकसान हो चुका है. जानकारी के अनुसार यह शेयर कथित तौर पर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी योजना के कारण चर्चा में रहा है, जिसमें गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अन्य आरोपी हैं, और कंपनी को प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में देखा जा रहा है.

अडानी ग्रुप कंपनियों के मार्केट कैप कितनी गिरावट

  1. ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज, जिसके शेयर की कीमत इस साल 27 फीसदी कम हुई है, के मार्केट कैप में दूसरी सबसे बड़ी गिरावट 94,096 करोड़ रुपए देखने को मिली है.
  2. अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक ज़ोन (APSEZ) में भी गिरावट देखी गई है, जिसका बाजार पूंजीकरण इसी अवधि के दौरान 33,029 करोड़ रुपये या 11.40 फीसदी घट गया है.
  3. अडानी टोटल गैस के मार्केट कैप में 31.84 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिली. इसका मतलब है कि कंपनी के मार्केट कैप में 32,411.40 करोड़ रुपए की कमी आइै है.
  4. अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के मार्केट कैप में 18.95 फीसदी 14,546.59 करोड़ रुपए की गिरावट देखने को मिली है.
  5. अडानी के स्वामित्व वाले सीमेंट शेयरों में भी गिरावट देखी गई, जिसमें एसीसी और अंबुजा सीमेंट्स में क्रमशः 23.10% और 15.92% की गिरावट आई.
  6. अडानी विल्मर (AWL एग्री बिजनेस) में 17.35% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सांघी इंडस्ट्रीज में 36.84% की गिरावट आई.
  7. अडानी पावर ने क्षेत्रीय अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद बाजार पूंजीकरण में 2.11% की मामूली गिरावट देखी.
  8. अडानी ग्रुप की मीडिया कंपनी NDTV की वैल्यूएशन में 41.58 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.

सुर्खियों में रहे अडानी ग्रुप के शेयर

वित्त वर्ष 2025 में अडानी स्टॉक में गिरावट के लिए कई फैक्टर्स को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसमें व्यापक शेयर बाजार की कमजोरी भी शामिल है. 31 मार्च, 2025 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में भारतीय इक्विटी बाजार को व्यापक आर्थिक चुनौतियों, कमजोर शहरी खपत और ट्रम्प टैरिफ के आसपास अनिश्चितता सहित जियो पॉलिटिकज रिस्क का सामना करना पड़ रहा है. नीतिगत अनिश्चितताओं और बढ़ती वैश्विक ब्याज दरों के कारण रिन्युएबल और गैस जैसे सेक्टर्स में वैल्यूएशन में सुधार देखा गया है, जिसने कैपिटल इंटेंसिव बिजनेस को प्रभावित किया है. शेयरों पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भी असर पड़ा है, जिन्होंने भारतीय इक्विटी बेचने पर दोगुना जोर दिया है. उन्होंने 30 सितंबर, 2024 को समाप्त होने वाली तीन तिमाहियों में अडानी समूह के छह शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की.

अडानी ग्रुप के शेयर रेगुलेटरी इश्यूज की वजह से भी सुर्खियों में रहे. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में पूर्व सेबी अध्यक्ष माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच को अडानी परिवार से संबंधित ऑफशोर कंपनियों से जोड़ा गया, जिसने इस वित्त वर्ष में काफी सुर्खियां बटोरीं. अरबपति गौतम अडानी पर “कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला” चलाने का आरोप लगाने के डेढ़ साल बाद, हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक और बड़ा दावा किया, जिसमें कहा गया कि बुच के पास ग्रुप से जुड़े ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी थी. वहीं दूसरी ओर कंपनी पर अमेरिकी कोर्ट में रिश्वत के भी आरोप लगे. वैसे अडानी ग्रुप ने इन तमाम आरोपों से किया किया और नकार दिया.

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