Thursday, January 15, 2026
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बलूचिस्तान में 15 दिनों के लिए धारा 144 बढ़ाई, बाइक पर 2 लोग नहीं बैठ सकेंगे

क्वेटा बलूचिस्तान की प्रांतीय सरकार ने कानून-व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए पूरे प्रांत में धारा 144 की अवधि 15 दिनों के लिए और बढ़ा दी है। इस अवधि में हथियारों का प्रदर्शन और उपयोग, मोटरसाइकिल पर डबल सवारी, काली शीशे वाली गाड़ियां, बिना पंजीकरण वाली मोटरसाइकिलें, तथा पांच या अधिक लोगों के जमावड़े, धरना, जुलूस और रैली पर प्रतिबंध रहेगा। निर्देश में यह भी कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढकना, खासकर मफलर, मास्क या किसी भी अन्य तरीके से पहचान छिपाना भी पूरी तरह वर्जित होगा।
नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के केंद्रीय प्रवक्ता शाहजेब बलोच ने इन प्रतिबंधों को असंवैधानिक करार दिया और पत्रकार वार्ता में कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान और देशभर के अन्य वंचित समूहों के कार्यकर्ताओं को न केवल परेशान किया जा रहा है बल्कि उन्हें जबरन गायब करने जैसी गंभीर रणनीतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।शाहजेब ने कहा कि सरकार को चाहिए कि सभी लापता बलोच और अन्य पीड़ितों को वापस लाने की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता पर आरोप है तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को सामूहिक सजा देना जातीय और राष्ट्रीय शुद्धिकरण की तरह है और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।
इस बीच खुजदार जिले के जवाह और जहरी इलाकों में तनाव बढ़ गया, जहां क्वेटा-कराची राजमार्ग को प्रदर्शनकारियों ने दूसरे दिन भी जाम रखा। यह विरोध तब शुरू हुआ जब हब चौकी से खुजदार जा रही एक वैन से यात्रियों को अगवा कर लिया गया। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि हाल ही में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक वैन को रोका, जिसमें से महिलाओं और बच्चों को उतारने के बाद पुरुष यात्रियों और वाहन को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। स्थानीय नेता बाबा फतेह जहरी ने फोन पर पत्रकारों को बताया कि खुजदार प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को खत्म करने के लिए बल प्रयोग किया। लवीज बलों ने गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे दो यात्री घायल हो गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बलों ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया और युवाओं को पीटा। फतेह ने जहरी क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में धरने में शामिल होने की अपील की ताकि खुजदार प्रशासन की ज्यादतियों को रोका जा सके।

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी जिद और अड़ियल रवैए के कारण भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाकर दबाव बनाने की कोशिश की थी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने इसका समाधान निकालते हुए ऐसे कई कदम उठाए जा रहे हैं जिससे अमेरिकी टैरिफ का भारत पर कोई असर न पड़े। रिपोर्ट के मुताबिक दो सीनियर अधिकारियों ने बताया कि सरकार सबसे पहले नकदी की समस्या का समाधान निकालने पर विचार कर रही है। वहीं निर्यात और रोजगार बचाने के लिए सरकार कोविड स्टाइल में योनजाएं चलाना चाहती है। ट्रंप के टैरिफ की वजह से कई तरह के दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे कि भुगतान में देरी, देर से सामान का पहुंचना, ऑर्डर रद्द होना। वहीं निर्यात को बरकरार रखने के लिए नई मार्केट की जरूरत है। जब तक नई मार्केट नहीं मिलती, निर्यातकों को ऑपरेशन जारी रखने के लिए राहत देना जरूरी है। अधिकारियों ने कहा कि टैक्स से जुड़ी भी कई राहत देने पर सरकार विचार कर रही है। इसमें जीएसटी रिफॉर्म भी शामिल है। अगले सप्ताह होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स घटाने से संबंधित कई फैसले हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर मजबूती की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था को खतरा नहीं है। टैरिफ जैसे बाहरी फैक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि घरेलू उपभोग की वजह से अर्थव्यवस्ता लचीली है। निर्यात अर्थव्यवस्ता के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन यह भारत की जीडीपी 4.12 ट्रिलियन डॉलर का छोटा हिस्सा है। निर्यात का जीडीपी में योगदान केवल 10 फीसदी यानी 438 मिलियन डॉलर का ही है। ऐसे में जून में समाप्त होने वाली तिमाही में भी आर्थिक वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही। सरकार कर सकती है राहत पैकेज का ऐलान अधिकारियों के मुताबिक सरकार ने कोरोना लॉकडाउन के दौरान जिस तरह के राहत पैकेज का ऐलान किया था, उसी तरह के राहत पैकेज का एक बार फिर ऐलान हो सकता है। उद्योगों में नकदी की समस्या, खास तौर पर लघु और मध्यम उद्योगों के लिए इस तरह की योजनाएं जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम जैसी योजनाओं पर फोकस करना चाहती है जो कि 100 फीसदी गारंटी के साथ बिना जमानत के लोन उपलब्ध करवा सकें। इससे लाखों छोटे और मध्यम उद्योग दीवालिया होने से बच जाएंगे। लॉकडाउन के दौरान जब 68 दिनों के लिए औद्योगिक गतिविधियां ठप हो गई थीं, तब इसी योजना ने उद्योगों को बचा लिया था।अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समस्या और उसके समाधान को देखते हुए इन योजनाओं में बदलाव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तत्काल राहत के साथ सरकार चरणबद्ध तरीके से भी योजानाएं लागू करेगी जिससे लंबी अवधि की रणणनीति तैयार हो सके। नकदी उपलब्ध करवाने के साथ ही मौजूदा व्यापार समझौतों को मजबूत करने और नई मार्केट में अवसरों की तलाश का काम भी तेज होगा।
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